31,287.24 एकड़

अधिग्रहित भूमि (आधिकारिक डेटा)

6,000+ परिवार

अधिग्रहण के दौरान विस्थापित

एक महान बलिदान की दास्तां

1950 के दशक के उत्तरार्ध और 1960 के दशक की शुरुआत में, जब भारत औद्योगिक विकास की ओर बढ़ रहा था, मैथिल समाज के लगभग 60 घरिया (घरों) के एक समूह ने राष्ट्र की प्रगति के लिए वह दिया जो धन से कहीं अधिक मूल्यवान था: अपनी पूर्वजों की भूमि।

उन्होंने इस विश्वास के साथ अपने खेत, सामुदायिक क्षेत्र और जंगलों को समर्पित कर दिया कि ये भूमि राष्ट्रीय औद्योगिक प्रगति का आधार बनेगी। इसी भूमि ने स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के विशाल इस्पात संयंत्र का मार्ग प्रशस्त किया।

जमीनी हकीकत और चुनौतियां

दशकों से SAIL ने हजारों लोगों को रोजगार देने का दावा किया है—BSL में ही लगभग 16,000 से अधिक विस्थापित व्यक्तियों को रोजगार देने की बात कही गई है। लेकिन धरातल पर कहानी कुछ और ही है।

यह कहानी है अधूरे वादों, अपनी पहचान खोने और सामुदायिक उपेक्षा की। मूल गांवों का आज तक उचित पुनर्वास नहीं किया गया है।

हमारी विरासत और भविष्य का संकल्प

आज 60 साल बाद भी, स्थानीय नेता और विस्थापित समूह न्याय, पुनर्वास और उस सम्मान की तलाश में हैं जिसका वादा किया गया था।

समाज का अन्य सामाजिक योगदान

भूमि दान के अलावा, हमारे समाज ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है:

चंदनकियारी: हाई स्कूल, ब्लॉक और अंचल कार्यालय, तथा PHC।
देओली, पहाड़ीगोड़ा: सरकारी स्कूल और PHC।
दुर्गी, झालदा: सरजू प्रसाद औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI)।
पुपुनकी: मिश्रा परिवार द्वारा प्राथमिक विद्यालय।

हमारे त्यौहार

मैथिल संस्कृति के महापर्वों और त्योहारों की जानकारी यहाँ जल्द ही साझा की जाएगी।